सरकार ने बजट 2026 के बाद सूचित किया है कि आर्थिक आँकड़ों में अधिक प्रासंगिकता लाने के लिए जीडीपी और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार वर्ष बदले जाएंगे। अब तक देश की जीडीपी गणना के लिए आधार वर्ष 2011–12 था, जबकि महंगाई नापने के लिए 2012 का आधार अपनाया गया था। नए प्रस्ताव के तहत जीडीपी का आधार वर्ष बदलकर 2022–23 किया जाएगा और CPI का आधार वर्ष 2024 किया जाएगा। इसका मतलब है कि अब से मुद्रास्फीति और विकास दर की रिपोर्ट इसी नए आधार से की जाएगी, जिससे हाल की खपत और उत्पादन की वास्तविक स्थितियों के अनुरूप आँकड़े तैयार होंगे। इस बदलाव से ऐतिहासिक ग्रोथ दरों और महंगाई दरों की गणना में अंतर आ सकता है, लेकिन इससे अर्थव्यवस्था की वास्तविक स्थिति में अचानक बदलाव नहीं आता। मूलतः यह एक मापक परिवर्तन है जो पुरानी नियमावली के मुकाबले नए खर्चों और आर्थिक पैटर्न को प्रतिबिंबित करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार इससे आर्थिक नीतियों के लिए बेहतर निर्णय लेने में मदद मिलेगी, क्योंकि सांख्यिकी अधिक सटीक और अद्यतित होगी। आम जनता के रोजमर्रा के खर्च और दामों पर इस परिवर्तन का कोई असर नहीं होगा, लेकिन सरकारी आँ...